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Part-1

ये जो कहानी मैं शुरू करने जा रहा हूँ, ये इतिहास की वो सच्ची कहानी है, जिसको जानबूझ कर भरतवंशियों को नीचा दिखाने के लिए इतिहास से हटा दी गई है। (आइये, अपना इतिहास पुनर्जीवित करें!)
_______________________________ भूमिका- आप सबने पढ़ा, सुना ही होगा कि अफगानिस्तान की गजनी का महमूद गजनी, वहां से विजय करता हुआ चला और सोमनाथ मंदिर को तोड़कर, लूटकर चला गया। हमने भी उसकी वीरता के किस्से ही पढ़े हैं। वो निस्संदेह साहसी था, हिम्मती था। लेकिन ये सच नहीं है कि वो जीत कर ही वापस गया था। दरअसल कहानी कुछ और है, जिसको गुजरात के ही लेखक स्व. के. एम. मुंशी जी ने अत्यधिक शोध कर के लिखा है। उन्होंने अपनी पुस्तकों में जगह जगह 'उद्धरण (रिफरेन्स)' भी दिया हुआ है, कि कहाँ कहाँ से उन्होंने तथ्य लिया है। मुंशी जी का संक्षिप्त सा जीवन परिचय- यंग इंडिया के संपादक, आजीवन भारतीय विद्या भवन के अध्यक्ष, मृत्युपर्यंत संस्कृत विश्व परिषद् के अध्यक्ष, १९५२-१९५७ तक उत्तरप्रदेश के राज्यपाल, १९५७ में ही भारतीय इतिहास काँग्रेस की अध्यक्षता भी किया। और भी बहुत से सम्मानित पदों पर वे आसीन होते रहे। अनेकों 'प्रमुख प्…